*पत्रिका 'अभिव्यक्ति' के नए अंक का विमोचन*
काम, क्रोध, मोह, लोभ से ही मुकदमों का जन्म होता है और इसका विश्लेषण साहित्य में होता है। इसे ही पोएटिक जस्टिस कहते हैं। जैसा समाज होता है वैसा ही न्याय होता है। कानून के क्षेत्र में साहित्य जैसा न्याय नहीं होता बहुधा न्याय होता भी है और कहीं-कहीं नहीं भी हो पाता। मेरा मानना है कि साहित्य से जुड़े लोगों को अल्पसंख्यक न कहकर ये कहा जाना चाहिए कि आपके ऊपर सरस्वती का आशीर्वाद है। उपरोक्त बातें माननीय न्यायमूर्ति सिद्धार्थ ने उच्च न्यायालय इलाहाबाद के कर्मचारीगण के सामूहिक प्रयास से निर्गत होने वाली पत्रिका अभिव्यक्ति के नए अंक के विमोचन के अवसर पर कहीं।
माननीय न्यायमूर्ति अजित कुमार ने कहा कि साहित्य ही समाज का निर्माण करता है। जो कुछ भी समाज में घटित होता है वही समाज के सामने साहित्य के माध्यम से रखा जाता है। उन्होंने साहित्य की महत्ता को रेखांकित करते हुए कहा कि आजादी की लड़ाई में भी साहित्य का सहारा लिया गया। आजादी के बाद यदि भाषा और न्याय की आजादी की बात करें तो पाएंगे कि हिंदी भाषा आज भी अपना अस्तित्व नहीं बना पाई है। हिंदी में कानून की पढ़ाई करना आसान नहीं है।
माननीय न्यायमूर्ति गौतम चौधरी ने कहा कि साहित्य और भाषा एक दूसरे के पूरक हैं। हिंदी मेरी मातृ भाषा है और बाकी भाषाएँ हमारी मौसियां हैं जिनसे हमारा कोई राग-द्वेष नहीं है लेकिन पीड़ा तब होती है जब 5-7 साल के बच्चे हिंदी के अंकों के बारे में भी सामान्य जानकारी नहीं रखते। उन्होंने पत्रिका के नाम अभिव्यक्ति के संदर्भ में कहा कि बिना साहस के अभिव्यक्ति नहीं हो सकती। सच को सच कहने का साहस भी राष्ट्रभक्ति है। भाषा को लेकर मैं सजग रहता हूँ लेकिन मेरी क्लिष्ट भाषा की कोशिश नहीं रहती।
इससे पहले वरिष्ठ कवि हरीशचंद्र पाण्डे ने पत्रिका से जुड़े हर व्यक्ति की सराहना करते हुए बधाई दी। उन्होंने मुंशी प्रेमचंद की कहानी पँच परमेश्वर के हवाले से न्याय और साहित्य के अंतर्संबंधों पर अपनी बात रखी।
विद्वान महनिबन्धक राजीव भारती ने कहा कि आज के समय में लोगों का अधिकांश समय सोशल मीडिया पर ही बीतता है ऐसे में ऐसी पत्रिकाएं हमारे बाद के जेनेरेशन को साहित्य सृजन की परंपरा से बाँधे रखेंगी। साहित्य से ही संवेदना है। ऐसे में साहित्य को बढ़ावा देना चाहिए।
मँच संचालन किया पत्रिका के संपादक शिवानन्द मिश्र ने।राजेश कुमार मौर्या, महिष द्विवेदी, नीरज राय, आशिष मिश्र, आकाश शुक्ला, इन्द्रकान्त शुक्ला, सिद्धार्थ कुमार, राजेश शर्मा, अरविंद गौतम, धनीराम वर्मा, अनिल सोनकर, के के सिंह, आशिष प्रताप सिंह, अंकुर प्रताप सिंह चौहान, अमित धाकड़े, निधि त्रिपाठी, डी के पाण्डे, शिवम गुप्ता,अतुल, गोपाल स्वरूप सिंह, पंकज मिश्रा, देवेंद्र सिंह, विनोद पाठक, विपिन मिश्र, सत्यप्रकाश, मनोज शर्मा, संजीव झा और प्रकर्ष मालवीय और बड़ी संख्या में कर्मचारीगण सभा में उपस्थित रहे।